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काउंटिंग से पहले ही कैसे नतीजों का लगता है सटीक अनुमान…? जानें- कैसे होते हैं एग्जिट पोल…भारत में पहली बार कब हुए?

क्षिप्राखबर डेस्क। मध्य प्रदेश में शिवराज फिर आएंगे या कांग्रेस वापसी करेगी? छत्तीसगढ़-राजस्थान में क्या कांग्रेस सरकार बचाने में कामयाब होगी? तेलंगाना में क्या इस बार कुछ बदलेगा? और मिजोरम में सत्ता किसके पास जाएगी? बस कुछ घंटों का इंतजार और फिर इसका मोटा-मोटा अनुमान लग जाएगा। इन पांचों चुनावी राज्यों के एग्जिट पोल आज शाम साढ़े छह बजे आ जाएंगे। तेलंगाना में गुरुवार शाम 6 बजे जैसे ही वोटिंग खत्म होगी, उसके ठीक आधे घंटे बाद एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ जाएंगे। एग्जिट पोल से चुनावी नतीजों की एक तस्वीर पता चलती है। हालांकि, कई बार एग्जिट पोल गलत भी साबित होते हैं। कैसे कराए जाते हैं एग्जिट पोल…?

एग्जिट पोल एक तरह का चुनावी सर्वे है, जो मतदान वाले दिन किया जाता है। वोटिंग वाले दिन जब मतदाता वोट डालकर बूथ से बाहर आता है तो वहां अलग-अलग सर्वे करने वाली एजेंसी और न्‍यूज चैनल मौजूद होते हैं। ये मतदाता से मतदान को लेकर सवाल पूछते हैं। उनके जवाब से पता चलता है कि लोगों ने किस राजनीतिक दल को वोट दिया है। मतदाताओं के जवाब से ही अंदाजा लगाया जाता है कि जनता किस पर भरोसा कर रही है। यह सर्वे हर विधानसभा की अलग-अलग पोलिंग बूथों पर किया जाता है। एग्जिट पोल में सिर्फ वोटर्स को ही शामिल किया जाता है। यह भी पहले से तय नहीं होता है कि किस मतदाता से सवाल पूछा जाएगा।


जाने कब हुई थी भारत में एग्जिट पोल की शुरुआत…?

1960 में दिल्ली स्थित सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (CSDS) की थी। 1980 के दशक में पत्रकार प्रणव रॉय ने इलेक्‍शन एक्‍सपर्ट डेविड बटलर के साथ मिलकर एक सर्वे किया था, जोकि ‘द कॉम्पेंडियम ऑफ इंडियन इलेक्शन’ नामक किताब में छपा था। 1996 में सीएसडीएस देशव्यापी सर्वे किया था, जो दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। 1998 में प्राइवेट न्‍यूज चैनलों पर पहली बार एग्जिट पोल का प्रसारण किया गया था।

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