क्षिप्रा

क्षिप्रा तट पर ब्राह्मणों द्वारा यज्ञोपवीत का आयोजन, प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। श्रावण मास की पूर्णिमा पर क्षिप्रा नदी के तट पर क्षेत्र के ब्राह्मणों द्वारा श्रावणी उपाकर्म किया गया। सर्व ब्राह्मण समाज क्षिप्रा के तत्वाधान में यह आयोजन पंडित नितेश (मोनू गुरु) द्वारा वैदिक विधि से श्रावणी उपाकर्म को संपादित कराया। उन्होंने बताया कि श्रावणी उपाकर्म के तीन पक्ष हैं। प्रायश्चित संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय। प्रायश्चित रूप में हेमाद्रि स्नान संकल्प। गुरु के सान्निध्य में ब्रह्मचारी गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमुत्र और पवित्र कुशा से स्नान कर वर्षभर में जाने-अनजाने में हुए पापकर्म का प्रायश्चित कर जीवन को सकारात्मकता से भरते हैं।

यह धार्मिक आयोजन प्रात:काल से दोपहर तक जारी रहा। सर्वप्रथम वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हेमाद्रि स्नान, देव तर्पण, ऋषि तर्पण, और पितृ तर्पण किया गया। उसके उपरांत सप्तऋषि पूजन, नवीन यज्ञोपवित्र धारण कर हवन कुंड में आहुतियां प्रदान की गई। इसके बाद आरती और प्रसाद के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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