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जानिये, महिषासुर मर्दिनी कात्यायनी माता के जन्म का रहस्य

क्षिप्राखबर डेस्क। शारदीय नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा की छठी शक्ति मां कात्यायनी को समर्पित है। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण इनका नाम कात्यायनी रखा गया। मां कात्यायनी की पूजा से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इनकी कृपा से योग्य वर और विवाह की सभी अड़चनें दूर हो जाती है। ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं। मां कात्यायनी सफलता और यश का प्रतीक हैं। भगवान कृष्ण को पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्ही की पूजा कालिंदी नदी के तट पर की थी। ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

महिसासुर मर्दिनी मां कात्यायनी की जन्मकथा…
देवी महिषासुर मर्दनी के पौराणिक कथा के अनुसार एक बार महर्षि कात्यायन ने संतान की प्राप्ति के लिए मां भगवती की कठोर तपस्या की थी। महर्षि कात्यायन की कठोर तपस्या से मां भगवती प्रसन्न हुई थी और उन्हें साक्षात दर्शन दिए। कात्यायन ऋषि ने मां के सामने अपनी इच्छा को प्रकट की, इसपर मां भगवती ने उन्हें वचन दिया और कहा कि वह उनके घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। वहीं एक बार महिषासुर नाम के एक दैत्य का अत्याचार प्रितिदित तीनों लोकों पर काफी बढ़ता ही जा रहा था। इससे सभी देवी-देवता परेशान हो गए थे।
तब उस समय त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु और महेश अर्थात भगवान शिव के तेज से देवी को उत्पन्न किया, जिन्होने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया। महर्षि कात्यायन के घर जन्म लेने के वजह से उन्हें कात्यायनी नाम दिया गया। माता रानी के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद ऋषि कात्यायन ने सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर मां कात्यायनी की काफी विधि-विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की। इसके बाद फिर मां कात्यायनी ने दशमी के दिन महिषासुर दानव का वध किया। तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।


मां कात्यायनी के प्रभावशाली मंत्र…

1- ॐ ह्रीं नम:।।

2- या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां कात्यायनी का प्रिय भोग…

मां कात्यायनी को शहद बहुत ही प्रिय है, इसलिए पूजा के समय मां कात्यायनी को शहद का भोग अवश्य लगाएं ऐसा करने से स्वयं के व्यक्तित्व में निखार आता है।

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