क्षिप्रा

जिसने नशा राम का किया उसका नाश नहीं हो सकता – संत श्री मोहित नागर

  • भागवत कथा के पूर्व निकली कलश यात्रा में 12 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने कर दिया भक्तिमय माहौल

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। जिसने राम के नाम का नशा कर लिया है उसका कभी नाश नही हो सकता। राम धर्म का अवतार है, और धर्म हमारे संस्कारों और चरित्र का निर्माण करता है। धर्म उत्थान के लिए होता है। धर्म वहीं है जहां श्रेष्ठ चरित्र है। ईश्वर के प्रति विश्वास और भक्ति के साथ दूसरों को सुख पहुंचाने का संकल्प लेने वाला ही धर्म की रक्षा कर सकता है। गौ सेवा और कन्यादान से बढ़कर संसार में कोई धर्म नहीं है। जिस भागवत के पूर्व कलश यात्रा निकाली जाती है वहां गंगा जल के साथ श्री राधा रानी का पदार्पण होता हैं उक्त उद्गार सोमवार को कथा वाचक भागवताचार्य संत श्री मोहित नागर ने श्रीमद भागवत कथा के पहले दिन कथा के महत्व का वर्णन करते हुए कहा। सोमवार को नगर का चप्पा चप्पा भक्तिमय माहौल में गूंज उठा जब पूण्य पतित पावन सलिला माँ क्षिप्रा के तट से जल भरकर 12 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने क्षिप्रा से ज्योति कालोनी तक निकली भव्य कलश यात्रा में अपनी आस्था के स्वरूप को प्रकट करते हुए कलश यात्रा को विहंगम रूप में परिणित किया। कलश यात्रा में श्रीमद्भागवत  कथा आयोजक अनिता-दिलीप अग्रवाल एवं परिजनों ने श्रीमद भागवत महापुराण को अपने सिर पर धारण कर यात्रा में निकले। क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों, संस्थाओ ने कलश यात्रा मार्ग पर जगह जगह स्वागत मंच लगाकर पुष्पवर्षा से कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया जो देखते ही बन रहा था। 2 किमी से अधिक लम्बी कलश यात्रा में नाचते झूमते श्रद्धालुओं एवं राधा-कृष्ण की संजीव झांकियो को देखकर सनातनियों में आस्था का संचार दिखाई दे रहा था। आयोजक द्वारा सभी कलशधारी मातृशक्ति को कलशयात्रा के पश्चात भोजन प्रसादी ग्रहण कराई गई। तत्पश्चात 12.30 बजे भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।61 कन्याओं का होगा विवाह…

श्रीमद भागवत कथा आयोजक अनिता दिलीप अग्रवाल और उनके परिवार द्वारा भागवत कथा में 61 कन्याओें के पिता बनकर निशुल्क विवाह कर कन्यादान का पुण्य अर्जित करने जा रहे हैं। यह सब बिना ठाकुरजी की कृपा के बिना प्राप्त नहीं हो सकता। जो दूसरों के प्रति दया भाव रखता है वहां धर्म दिखाई देता है। जो भगवान पर भरोसा करता है उसे ही भगवान अनुष्ठान की प्रेरणा देते हैं। ऐसे व्यक्ति अनंत की चिंता नहीं करते, वे अंत की चिंता करते हैं। अंत अर्थात मोक्ष, ज्ञानी को अभिमान रहता है भक्तों को नहीं। ज्ञानी की गलती को ठाकुर जी माफ नहीं करते मगर भक्त की गलती को नजर अंदाज कर उसकी गलती को भी भक्ति मानते हैं। संत श्री नागरजी ने श्रीमद भागवत कथा के दृष्टांतों को क्षेत्र की सरल भाषा मालवी में बड़े ही सुंदर भाव के साथ व्यक्त करते हुए भजनेां के माध्यम से एवं दृष्टांतों के मार्मिक वर्णन से मंत्र मुग्ध कर दिया।आध्यात्मिक प्रवक्ता सुगना बाईसा ने की व्यास पीठ की पूजा… 

कथा के मध्य में आध्यात्मिक प्रवक्ता एवं भागवताचार्य सुगना बाईसा ने पधारकर व्यास पीठ की पूजा की। इसके पश्चात अपने उद्बोधन में कलियुग में धर्म की चार प्रकार की स्थितियों का वर्णन करते हुए कहा कि हम सबके आराध्य प्रभु श्री राम का 22 जनवरी को भव्यातिभव्य उत्सव मनाया जा रहा है। यह हमारे लिये सौभाग्य का विषय है कि हम सब और हमारी पीढ़ी इसकी साक्षी रहेगी। कथा में बड़ी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे। कथा प्रतिदिन सुबह 10 बजे से आरंभ होगी। तथा भागवत कथा श्रवण करनेे वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी।

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