क्षिप्राइंदौर

ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट के ख़ुलासे से गदगद देश, हजार साल पुराने मंदिर के प्रमाण मिले

  • नंदी की प्रतीक्षा का अंत आया निकट…
  •  बज़ा…शिवशंकर का डमरू मंदिर के खम्बों पर खड़ी है ” ज्ञानवापी मस्जिद “, सर्वे में हुआ स्पष्ट ख़ुलासा…
  • काशी सहित देशभर में उत्साह का माहौल, मस्जिद में मन्दिर होने के 32 प्रमाण…
  • अब वजुखाने के सर्वे की मांग हुई बुलंद, यहां मिला था विशाल शिवलिंग जिसे फ़व्वारा बताया…

इंदौर से नितिनमोहन शर्मा की खास रिपोर्ट…

“ज्ञानवापी” यानी ज्ञान का कुंआ। अब बताइये इस नाम से कोई मस्जिद या इबादतगाह हो सकता हैं? वह भी ठीक मन्दिर के बगल में। ये सब उस दौर में हुआ, आबादी कम और जमीन ज्यादा थी। बावजूद इसके ठीक काशी विश्वनाथ से सटकर मस्जिद का निर्माण? है न हैरत की बात। औरंगजेब के पास जमीन की कोई कमी थी क्या? खेर इस तर्क वितर्क में सदिया गुजर गई लेकिन “विजेता” होने की मानसिकता में रत्तीभर फर्क नही आया। अब ये ख़ुलासा हो गया है कि हिन्दू नाम वाली ये मस्जिद, हिन्दू मन्दिर को तोड़कर ही बनाई गई थी। ऐसे 32 प्रमाण सामने आए है जो उस नंदी देवता की प्रतीक्षा की गवाही दे रहें हैं, जो बरसो बरस से अपने इष्ट की तरफ पीठ फेरकर बैठे हैं इस जिद में कि ” मेरे महादेव तो इसी तरफ है, जिस तरफ मेरा मुंह हैं।” उन्ही नंदी देवता को न्याय मिलने का लगता है समय आ गया हैं। तभी तो खुलासा फर्स्ट ने अयोध्या से बिदाई पर कहाँ था- चलिए मिलते है जल्द काशी-मथुरा में।अभी तो सियावर रामचन्द्रजी के 500 बरस के वनवास की वापसी और भव्य प्राणप्रतिष्ठा की खुमारी पूरी तरह उतरी भी नही थी कि काशी से डमक-डमक डमरू की गड़गड़ाहट गूंज गई। ये गूंज उस सर्वे रिपोर्ट के खुलासे के बाद गुंजी हैं, जिसमे स्पष्ट हुआ कि अयोध्या की तरह काशी में भी विधर्मियों ने मंदिर का विध्वंस कर  मस्जिद का निर्माण किया। खुलासे में मस्जिद की जगह मन्दिर होने के एक दो नही 32 से ज्यादा स्पष्ट सबूत मिले हैं। सर्वे में साफ साफ नजर आया कि हिन्दू मन्दिर के खम्बों पर ही मस्जिद खड़ी है। मन्दिर भी करीब हजार साल पुराना हैं। नाग देवता, कमल पुष्प, टूटी हुई मुर्तिया आज भी मस्जिद के अंदर मौजूद हैं। मस्जिद के तहखाने में मन्दिर का स्तम्भ हिन्दू प्रतीकों के संग आज भी विद्यमान हैं। खण्डित मूर्तियों के साथ साथ उखाड़ी गई प्रतिमाओं के साक्ष्य भी मौजूद हैं।  दीवारों पर स्वस्तिक चिन्ह व कमल पुष्प हैं। मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की एक दीवार तो पूरी तरह उस नागर शैली की है, जिस शैली में भारत मे सेकड़ो मन्दिर हैं। पुरातत्व विभाग की इस सर्वे रिपोर्ट के आने के बाद काशी ही नही, पूरा देश गदगद हैं।
3 महीने से भी ज्यादा समय तक चले सर्वे के बाद हुए इस ख़ुलासे के बाद देश की “धर्मनिरपेक्ष राजनीति” को सांप सूंघ गया हैं। दूसरी तरफ हिन्दू पक्ष उत्साह से भर गया हैं। अब वो उस वजुखाने के सर्वे की मांग कर रहा है जहां विशाल शिवलिंग नुमा आकृति उज़ागर हुई थी। इस आकृति को फ़व्वारा बताया गया था और उसके बाद वजुखाने को सील कर दिया गया। काशी विश्वनाथ के आंगन में विराजमान विशाल नंदी देवता की प्रतिमा का मुंह भी इसी ज्ञानवापी मस्जिद और वजुखाने की तरफ ही हैं। ये तो सर्वविदित है कि नंदी का मुंह सदैव अपने आराध्य भोलेनाथ की तरफ ही रहता हैं। वर्तमान की काशी में ये नन्दी मौजूद काशी विश्वनाथ की तरफ पीठ किये हुए हैं। ऐसा कभी सम्भव ही नही कि नंदी देवता अपने महादेव से मुंह फेर ले? लिहाजा वजुखाने की जांच की मांग जल्द कोर्ट पहुँचने वाली हैं।
839 पन्नो की सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ओरेंगजब ने यहां मस्जिद संवत 1676-77 में बनवाई। जबकि जिस खम्बो पर मस्जिद टिकी हुई है, उस पर 1669 संवत दर्ज हैं। एक पत्थर भी मिला है जिसमे साफ लिखा है कि औरंगजेब ने यहां मस्जिद बनवाई। जबकि 34 शिलालेख ऐसे मिले जिसमे देवनागरी लिपि के साथ साथ कन्नड़, तमिल तेलगू में लिखा हुआ हैं। सर्वे रिपोर्ट में साफ लिखा है कि यहां हजार साल पुराना मन्दिर था और मस्जिद का निर्माण मन्दिर के अवशेषों से ही किया गया हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा है कि अभी भी कई मुर्तिया नीचे दबी हैं। एएसआई ने सर्वे में कई अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे ये साफ भी हुआ कि मस्जिद के अंदर के शिलालेखों में जनार्दन, रुद्र ओर उमेश्वर नाम भी पाए गए हैं।ओरेंगजब की जीवनी ही बताती है मंदिर तोड़ मस्जिद बनी…
सर्वे रिपोर्ट में ये ख़ुलासा भी हुआ कि ओरंगजेब ने ही काशी मन्दिर ओर उसके आसपास के सभी मंदिरों और स्कूलों को तोड़ने का फ़रमान जारी किया था। ये ख़ुलासा औरंगजेब की जीवनी से हुआ है जो “मासिर ए आलमगीरी ” के नाम से लिखी गई हैं। एक अन्य पत्थर भी मिला लेकिन उसे घिस दिया गया हैं ताकि मस्जिद के निर्माण और विस्तार की जानकारी स्पष्ट न हो। मन्दिर की घण्टियाँ टांगने के अवशेष मिले। दरवाजो पर पशु पक्षियों के चित्र भी मिले हैं। आंगन में एक कुआँ भी मिला है। मध्य में एक चेम्बर भी मिला जिस पर फूलों की आकृति है। प्रवेश द्वार पर पक्षी और तोरण मिले जिसे तोड़ दिया गया हैं।  घण्टियाँ ओर चारो ओर लेम्प लगी दीवार भी मिली हैं। तहखानों के निर्माण में मन्दिर के खम्बो का इस्तेमाल किया गया हैं।

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