क्षिप्रा

पुरुषों में उत्तम बनने के लिए भगवान राम और कृष्ण के सदमार्ग पर चलना होगा – संत श्री मोहित नागर

  • श्रीमद्भागवत कथा में हुआ कृष्ण लला का जन्म

  • पुष्पवर्षा, चॉकलेट लुटाई ओर लगा माखन मिश्री का भोग

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। दुख आने पर दुखी होने की बजाय भगवान का भजन करो, कष्ट में इष्ट को याद करोगे तो संकट नहीं होगा। दुखी वही रहेगा, जिसने राम को बिसारा है, जिसने दुख को भी भगवान की कृपा मान ली। वही भवसागर से पार हो सकता है। जिसने नियम और संयम के साथ मर्यादा का पालन करते हुए भक्ति की है वही प्रभु राम की कृपा का पात्र बनता है। उक्त उद्गार शिप्रा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर संत श्री मोहित नागर ने कथा का रसपान करवाते हुए दिए।पं नागर ने श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन करते हुए कहा कि चरित्र और संस्कार परिवार, समाज और राष्ट्र का उत्थान करता है। हमारे बदलते संस्कार और चरित्र हमारी सनातन परंपरा और राष्ट्र को भी गर्त में नहीं डाल दें इसी उद्देश्य को लेकर प्रभु ने यह आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करने का अवसर प्रदान किया। श्री कृष्ण की लीला कर्म प्रधान है। जैसा कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा। धर्म का पालन करते हुए श्रेष्ठ कर्म करने वाला श्री कृष्ण की भक्ति के योग्य होता है। प्रभु राम और श्री कृष्ण दोनों भक्ति ही नारायण की भक्ति है। नारायण भाव के भूखे हैं। ज्ञानी को मान सम्मान और धन मिल सकता है। किंतु श्रद्धा और विश्वास से भक्ति की तो अज्ञानी को भी नारायण मिल जाते हैं। पुराणों में वर्णित धन्ना जाट और नामदेव की कथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। राम की मर्यादा का पालन ही उनका भजन है। श्री कृष्ण की लीला का चिंतन कर निर्मल भाव के साथ भक्ति करने वाला श्रेष्ठता को प्राप्त करता है। इस संसार में हमें पुरुषों में उत्तम बनना है तो प्रभु राम ने जो किया वह करना है और श्री कृष्णा ने जो कहा है उसे करना होगा। कथा आयोजक दिलीप अग्रवाल एवं परिवार द्वारा 62 कन्याओं के निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह के संकल्प में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह के चौथे दिवस पर भागवताचार्य संत श्री मोहित नागर ने कथा प्रसंग के दौरान प्रभु श्री राम एवं श्री कृष्ण जन्म की कथा वृतांत के दौरान व्यक्त किए। आपने सरल भाषा में श्रोताओ को पौराणिक कथा में वर्णित गाथाओं का बहुत ही सुंदर चित्रण करते हुए मंत्र मुक्त कर दिया। 10 हजार से अधिक की बैठक व्यवस्था वाला पांडाल भी छोटा पड़ गया। आसपास के क्षेत्र सहित इंदौर, देवास, उज्जैन, हरदा अनेक शहरों से श्रोताओं ने आकर कथा श्रवण की। कथा में कृष्ण जन्म की सुंदर झांकी का चित्रण किया गया। आलकी की पालकी जय कन्हैया लाल की गीत से पूरा पांडाल गुंजायमान हो गया। महिलाएं एवं श्रोतागण नृत्य करने लगे। फूलों की वर्षा हुई, टॉफी लुटाई गई, माखन, मिश्री का प्रसाद बांटा गया। समूचा वातावरण गोकुलमय हो गया था। व्यासपीठ की पूजा दिलीप अग्रवाल एवं परिवार ने की। कथा में शुक्रवार को श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन होगा।

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