क्षिप्रा

बिगड़ी बात संवरने लगे तो समझना प्रभु की कृपा हो गई- संत श्री मोहित नागर

  • श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन हजारो की तादाद में कथा श्रवण करने उमड़े श्रद्धालु

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। भगवान पर भरोसा रखने वाला ही भगवान की कृपा का पात्र बन सकता है। संसार जब साथ छोड़ देता है तो बात बिगड़ती है। उस दौरान सांसारिक व्यक्ति के सामने रोना रोओगे तो हंसी के पात्र बन जाओगे। अगर भगवान के आगे अपना दुखड़ा रोओगे तो संकट से मुक्ति मिलेगी। जिस दिन आपकी बिगड़ी बात संवरने लगे तो समझ लेना प्रभु की कृपा हो गई। यही भाव भक्ति को पैदा करता है। भगवान अपने भक्त के लिए विधाता के नियम को भी बदल देता है, किंतु जब काम बिगड़ जाता है तो भगवान को दोष देते हैं। काम संवर जाए तो यह मानते है कि हमने स्वयं ने किया है। यही अहंकार पतन का कारण बनता है। काल को सिर पर रखकर हमेशा ईश्वर का चिंतन करता है वही पाप व्यक्ति से मुक्त हो सकता है। लोग मानते है कि सारा जीवन काम धंधा करके, उल्टा-सीधा करके धन कमाएंगे और अंतकाल में भगवान का नाम लेकर भवसागर पार कर लेंगे तो यहां भाव गलत है। तद्भावभावित: हमेशा ईश्वर के प्रति सच्चे भाव के साथ चिंतन और नाम स्मरण करोगे तभी अंत काल में आपके मुख से प्रभु का स्मरण होगा। कलयुग में हमें सनातन के विचारों के अनुरूप हमारे चरित्र को सवारना होगा। भक्ति के साथ कर्म करो, विचारों की शुद्धता के साथ श्रेष्ठ व्यवहार रखोगे तभी श्रेष्ठ कर्म फल प्राप्त होगा। यहां आध्यात्मिक विचार शिप्रा में हो रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भागवताचार्य संत श्री मोहित नागर ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा की कथा अनेक है, ईश्वर एक है। भक्ति के मार्ग अलग-अलग हो सकते हैं। मगर मुक्ति का मार्ग एक है। वो है ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम। रिश्तो की पवित्रता के साथ आचरण में शुद्धता रखते हुए माता-पिता की सेवा को भगवान की सेवा मानना ही ईश्वर की भक्ति है। भक्ति के लिए आडंबर कि नहीं पवित्र भाव की आवश्यकता है।श्रीमद् भागवत के ड्यूटी एवं द्वितीय एवं तृतीय स्कंद की कथा का वर्णन करते हुए हिर्नाकश्यप, हिरणाक्षय के जन्म की कथा, वराह अवतार का वर्णन, कपिल भगवान के जन्म की कथा, भक्त प्रहलाद की भक्ति का सुंदर वर्णन किया। हमारी क्षेत्रीय भाषा में सरल भाव के साथ कथा की रोचकता के साथ अनेक प्रसंगों में श्रोतागण भाव-विभोर हो गए। कथा में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरूष मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण कर रहे थे। व्यासपीठ की पूजा कथा आयोजक दिलीप अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, डॉ. अंकित एवं आकाश ने की। कथा का संचालन चेतन उपाध्याय ने किया।

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