क्षिप्रा

माता-पिता की सेवा भगवान की सेवा से भी अधिक फलदायी – पं दुबे

शिवमहापुराण में भगवान गणेश संग रिद्धि-सिद्धि का विवाह हुआ

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। माता पिता की सेवा भगवान की सेवा से भी बढ़कर है। दुनिया के किसी भी तीर्थ स्थल में जाकर इतना पुण्य नहीं मिलता जितना अपने माता-पिता की सेवा करने से मिलता है। यह बखान कथा व्यास पं. वैभव दुबे ने श्री शिवमहापुराण के दौरान श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करवाते हुए दिए।

श्री सिद्धि विनायक महिला मंडल द्वारा क्षिप्रा में भव्य शिवमहापुराण का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास पंडित वैभव दुबे प्रतिदिन अपनी सुमधुर वाणी से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करवा रहे है। रविवार को श्री शिवमहापुराण कथा में भगवान श्री गणेश विवाह की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि जब शिव पार्वती के समक्ष गणेश और कार्तिकेय के विवाह की बात आई तो उन्होंने एक शर्त रखी कि जो पृथ्वी की परिक्रमा करके सबसे पहले आएगा उसका विवाह होगा। यह बात सुनकर कार्तिकेय तो तुरंत अपना वाहन लेकर निकल पड़े लेकिन गणेश जी सोच में पड़ गए कि मैं कैसे कर पाऊंगा…? ऐसे में उन्हें एक युक्ति सूझती हैं और वे शिव पार्वती के लिए आसन लगाते है। शिव पार्वती को वहां बैठाकर सात बार पूजा और परिक्रमा करते है। परिक्रमा लगाने के पश्चात माता पार्वती भगवान गणेश से पूछती है कि हमने तुम्हे पृथ्वी पर परिक्रमा करने को कहा था तुम हमारी परिक्रमा क्यो कर रहे हो इसका उत्तर देते हुए गणेशजी कहते हैं कि वेद और पुराण में माता-पिता की परिक्रमा कर मिलने वाले फल को धरती की परिक्रमा लगाने पर मिलने वाले फल के समान कहा गया है। गणेशजी के इस भाव को देखकर शिव पार्वती प्रसन्न होते हैं उनका विवाह रिद्धि सिद्धि से करा देते हैं।

फ़ोटो : शिवमहापुराण के दौरान उपस्थित सिद्धि विनायक महिला मंडल की महिलाएं

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