क्षिप्रा

विघ्नों का विनाश करने वर्षों से खड़े स्वरूप में विराजित है “शिवपुत्र श्री गणेश”

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥


क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा

                            हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले भगवान श्री गणेश की पूजा और आराधना करना शुभ माना जाता है। कहते हैं भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी विघ्न एवं विनाशो को पल भर में हर लेते है। भक्तजन भगवान गणेश के प्राचीन मंदिरों में जाते हैं और बप्पा का आशीर्वाद पाते है।

फोटो: खड़े स्वरूप में विराजित “शिवपुत्र श्री गणेश”

 इंदौर जिले के क्षिप्रा में बने प्राचीन गणेश मंदिर की बात करे तो मध्यप्रदेश में इकलौता मन्दिर है जहाँ भगवान श्री गणेश अपने खड़े स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देने के लिये आतुर है। भक्तो के विघ्न को हरने एवं चिंताओं को मिटाने के लिए प्रथम पूज्यनीय भगवान श्री गणेश की प्रतिमा खड़े स्वरूप में है। इसलिए इन्हें विघ्न विनाशक चिंताहरण मन्दिर के नाम से जाना जा रहे है।श्री गणेशजी उत्तरमुखी स्वरूप में अपने भक्तों के सारे विघ्नों के विनाश एवं चिंताओं को हरने के लिए तकरीबन 53 से अधिक वर्षो से खड़े स्वरूप में है।

53 वर्ष पूर्व विद्वानो ने की थी मन्दिर की स्थापना….

       शिवपुत्र भगवान श्री गणेश जी मंदिर की स्थापना सन 1970 में आचार्योएवं विद्वानो द्वारा की गई थी। स्थापना के दौरान इंदौर के प्रसिद्ध श्री खजरानागणेश जी एवं उज्जैन के चिंतामन, इच्छामन एवं सिद्धिविनायक गणेश जी के आव्हान के साथ खड़े गणेश जी को इस मंदिर में स्थापित किया गया था।
मन्दिर की यह है मान्यता….
          मन्दिर के पुजारियों के अनुसार मध्यप्रदेश की एकमात्र खड़े गणेश जी की प्रतिमा दुर्लभ है। प्रत्येक बुधवार एवं चतुर्थी पर भगवान गणेश को विशेष श्रृंगार कर नव चोला धारण कराया जाता है। दूर दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओ के लिए आते है। इनके दर्शन एवं आराधना से सभी प्रकार के दु:ख दूर तथा समस्याओं का निवारण भी हो जाता है। गणेश उत्सव में पूजन व दर्शन करने का विशेष लाभ माना गया है। जानकारी अनुसार भगवान श्री गणेश ने तीन वर्ष पूर्व अपना चोला उतारा था। जब मन्दिर का जीर्णोद्धार चल रहा था। पुनः 24 जून 2020 को विधि विधान से भगवान को चोला धारण करवाया गया। स्वर्गीय पंडित चंद्रशेखर जोशी द्वारा अपने अपने सम्पूर्ण जीवनकाल मे भगवान श्री गणेश के चरणों मे सेवा दी। अब उनकी पीढ़ी मन्दिर में सेवा दे रही है।

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!