क्षिप्रा

शिव-पार्वती विवाह प्रसंग ने किया भाव-विभोर, झांकी ने शिव-भक्तों का मन मोहा

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। क्षेत्र के बरलाई रोड़ पर श्री सिद्धी विनायक महिला मंडल द्वारा आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। कथा व्यास पं. वैभव दुबे ने भगवान शिव-पार्वती के विवाह का बखान करते हुए कहा कि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। पार्वती ने मन में प्रण लिया की वह शिव को पति के रूप में प्राप्त करेंगी। देवता भी शिव जी को मनाते हैं कि वह पार्वती से विवाह कर लें लेकिन शिव जी इसके लिए तैयार नहीं हुए। माता पार्वती शिव जी को प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या करती हैं। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव विवाह के लिए तैयार हो जाते हैं। देवताओं, भूत-पिशाचों को लेकर तन में भस्म लगाए शिव बारात लेकर हिमालयराज के यहां पहुंचते हैं। माता मैना दूल्हे का भेष देखकर डर जाती हैं और पार्वती का विवाह करने से मना कर देती हैं। सभी जन समझाते हे कि शिव जी कोई साधरण नहीं हैं वह तो देवों के देव महादेव हैं। इसके पश्चात मां पार्वती और भगवान शिव का विवाह सम्पन्न होता है। इस दौरान शिव-पार्वती विवाह में श्रद्धालु झूमकर विवाह गीत गाने लगते है। शिवमहापुराण कथा का वाचन प्रतिदिन दोपहर दो बजे से सायं पांच बजे तक किया जा रहा है।

फोटो : शिवमहापुराण के दोरान  शिव-पार्वती का दर्शन कर भक्त निहाल हो गये

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