क्षिप्रा

स्थापना दिवस पर आरएसएस ने निकाला पथ संचलन

  • आरएसएस ने मनाया विजयादशमी उत्सव, निकला पथ संचलन
  • शाखा के प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले अतिथि रहे मौजूद
  • शक्ति की उपासना के लिए हुई थी संघ की स्थापना

क्षिप्राखबर @ क्षिप्रा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शाखा क्षिप्रा ने अपने 98वे स्थापना दिवस पर क्षिप्रा नगर में पथ संचलन निकाला। सर्वप्रथम क्षिप्रा नदी तट पर सैकड़ो स्वयंसेवको ने कतारबद्ध होकर अनुशासन का परिचय दिया और धर्म ध्वज फहराया। इस अवसर पर सन 1972 में आरएसएस शाखा के प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण लेने वाले राधेश्याम बंसल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। ध्वज प्रणाम एवं अमृत वचन के बाद वक्ता लाखन सिंह तोमर ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि दुर्गापूजा शक्ति की पूजा है। जिस प्रकार सभी देवताओं के तेज से मां दुर्गा शक्ति की देवी के अंग-प्रत्यंग का निर्माण हुआ और मां दुर्गा ने शेर पर सवार होकर महिषासुर का वध कर धर्म की स्थापना की। उसी प्रकार 27 सितंबर 1925 को विजयादशमी के दिन आरएसएस की स्थापना हुई थी। उसी समय से सनातन धर्मावलंबी शक्ति के रूप में मां दुर्गा की पूजा प्रतिवर्ष करते आ रहे हैं। पथ संचलन में स्वयंसेवक घोष की ताल पर, कंधे पर डंडा रखकर कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। संचलन के दौरान आधा दर्जन कार्यकर्ता बैंड बाजों पर देशभक्ति धुन बजाते हुए चल रहे थे। सभी कार्यकर्ता फुलपेंट और सफेद शर्ट पहने थे। कई स्थानों पर पुष्प वर्षा कर लोगों ने पथ संचलन का स्वागत किया। स्वयंसेवकों का अनुशासन देखने सड़क के दोनों ओर कई लोग भी खड़े दिखे। पथ संचलन क्षिप्रा नदी तट से होते हुए पुराने एबी रोड़, पीरकराड़िया, तहसील ठप्पा, बरलाई रोड़, मंत्री काम्प्लेक्स, सर्विस रोड़, बूढ़ी बरलाई होते हुए पुनः आयोजन स्थल पहुंचा। संचालन के दौरान क्षेत्र में जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा।शक्ति की उपासना के लिए हुई थी संघ की स्थापना…
वक्ता लाखन सिंह तोमर ने राष्ट्रीय स्वयंसेवको को संबोधित करते हुए कहा कि शक्ति की उपासना के लिए संघ की स्थापना हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही एकमात्र संगठन है। जो बिना स्वार्थ के समाज हित व राष्ट्रहित में पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहा है। देश में जब भी कोई आपदा आई है तो संघ के स्वयंसेवक सेवा करने में सबसे आगे खड़े रहते हैं। देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखने व राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाने के लिए सन् 1925 में विजयादशमी के दिन ही डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक संघ निरंतर समाजहित, पर्यावरणहित और राष्ट्रहित में कार्यरत है।

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