क्षिप्रा

स्वर्ण सा चमकने लगा बाबा विश्वपति महादेव का दरबार

350 वर्ष पहले अहिल्याबाई ने की थी स्थापना…..

मयूर विष्णु वाघेला●क्षिप्रा


                          क्षिप्रा नदी तट पर स्थित 350 वर्ष प्राचीन श्री विश्वपति महादेव के दरबार का जीर्णोद्धार श्रावण माह में पूरा हो गया। गर्भगृह में चहुओर सुनहरी टाईल्स के साथ ही पीओपी एवं सुंदर लाइटिंग की गई है। जिसमे गर्भगृह का नजारा स्वर्ण मण्डित सा प्रतीत हो रहा है। भक्तों के अपार उत्साह और सहयोग से बाबा विश्वपति महादेव के दरबार को भव्यता प्रदान प्रदान की गई है। इस शिवालय के साथ ही मंदिर के समीप विराजित बाबा सिद्धपति हनुमानजी महाराज के दरबार को भी भव्य रूप दिया जा रहा है।

क्षिप्रा की कल-कल करती अविरल धारा के किनारे बना प्राचीन शिवालय होलकर स्टेट के प्राचीन शिवालयों में से एक है। तीन माह पूर्व जय श्री वीर बालाजी सेवा सत्संग समिति एवं भक्तजनों ने इस शिवालय का जीर्णोद्धार करने की ठानी। पं मनोज नागर ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसे-जैसे भक्तजन मन्दिर जीर्णोद्धार में सहयोग करते गए। वैसे-वैसे ही मंदिर को भव्य रूप दिया गया। अभी तक लगभग एक लाख पचास हजार रुपये की राशि शिवालय में खर्च हो चुकी है। जिसमे टाइल्स, लाइटिंग, पीओसी, पुताई आदि शामिल है। इस शिवालय के साथ ही मन्दिर के 100 मीटर दूर विराजित बाबा सिद्धपति हनुमान के दरबार को भी भव्यता दी जा रही है। श्रावण माह में प्रतिदिन हजारों की तादाद में भक्त पहुँच रहे है। अमावस्या-पूर्णिमा एवं प्रमुख तीज त्योहारों पर क्षिप्रा नदी तट पर पहुँचने वाले भक्त इस मंदिर में दर्शन को आते है।


यह कार्य हुए पूर्ण —
जीर्णोद्धार के तहत शिवालय में रंगाई-पुताई, लाइटिंग, पीओपी, टाइल्स लगाने के साथ ही मुख्य मार्ग से मन्दिर तक के मार्ग में हेलोजन लगाई गई है। शिव मंदिर के पीछे घाटो पर पौधे रोपे गए है। बाबा सिद्धपति हनुमानजी के दरबार मे आकर्षक पीओपी से भव्यता दी गयी है।

आगे यह कार्य किये जायेंगे —
पंडित मनोज नागर ने बताया कि जल्द ही शिव मंदिर के आसपास (दाए बाए ओर पीछे की तरफ) चद्दर शेड लगाए जाएंगे। मन्दिर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही हनुमानजी के मंदिर में टाइल्स, चद्दर शेड, रेलिंग लगाई जाएगी। मन्दिर के समीप पानी की टँकी, मन्दिर के पास खुली जगह पर मुरम या पेवर ब्लॉक लगाए जाने का विचार समिति कर रही है।

इस कारण प्रसिद्ध है शिवालय…..

शिवभक्त अहिल्याबाई के द्वारा सन 1770 और विक्रम संवत 1827 में मन्दिर का निर्माण करवाया गया था। मन्दिर को पूर्णत: अंदर से काँच की नक्काशियों से समूचा गया था। अब जीर्णोद्धार के पश्चात वहां सुनहरी टाइल्स लगा दी गयी है। पीतल की जलाधारी पर विराजित भगवान शिव का अपना अलग ही महत्व है। सफेद पाषाण पर जहा भगवान गणेश की प्रतिमा है तो वही काले पाषाण पर माता पार्वती भगवान गणेश को अपने बाल स्वरूप में खिलाते हुए नजर आ रही है। मन्दिर के बाहर नन्दीजी भी अपने शिव के सामने नतमस्तक हो रहे है। मन्दिर के समीप बने घाट को भव्य रूप दिए जाने के कारण शाम के समय सैकड़ो लोग टहलने भी आ रहे है।

फ़ोटो : जीर्णोद्धार के बाद स्वर्ण सा चमकने लगा श्री विश्वपति महादेव का दरबार


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